(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Aadiparv (Mahabharat) - आदिपर्व (महाभारत)


॥ श्रीः ॥
1.111. अध्यायः 111
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Topics
विचित्रवीर्यस्य अम्बिकाम्बालिकाश्यां विवाहः॥ 1 ॥ विचित्रवीर्यमरणम्॥ 2 ॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Text

वैशम्पायन उवाच। 1-111-0x(680)(4978)
अम्बायां निर्गतायां तु भीष्मः शान्तनवस्तदा।
न्यायेन कारयामास राज्ञो वैवाहिकीं क्रियाम्॥ 1-111-1(4979)
अम्बिकाम्बालिके चैव परिणीयाग्निसंनिधौ।
`तयोः पाणी गृहीत्वा तु कौरव्यो रूपदर्पितः।'
विचित्रवीर्यो धर्मात्मा कामात्मा समपद्यत॥ 1-111-2(4980)
ते चापि बृहतीश्यामे नीलकुञ्चितमूर्धजे।
रक्ततुङ्गनखोपेते पीनश्रोणिपयोधऱे॥ 1-111-3(4981)
आत्मनः प्रतिरूपोऽसौ लब्धः पतिरिति स्थिते।
विचित्रवीर्यं कल्याण्यौ पूजयामासतुः शुभे॥ 1-111-4(4982)
`अन्योन्यं प्रति सक्ते च एकभावे इव स्थिते।'
स चाश्विरूपसदृशो देवतुल्यपराक्रमः।
सर्वासामेव नारीणां चित्तप्रमथनो रहः॥ 1-111-5(4983)
ताभ्यां सह समाः सप्त विहरन्पृथिवीपतिः।
विचित्रवीर्यस्तरुणो यक्ष्मणा समगृह्यत॥ 1-111-6(4984)
सुहृदां यतमानानामाप्तैः सह चिकित्सकैः।
जगामास्तमिवादित्यः कौरव्यो यमसादनम्॥ 1-111-7(4985)
धर्मात्मा स तु गाङ्गेयः चिन्ताशोकपरायणः।
प्रेतकार्याणि सर्वाणि तस्य सम्यगकारयत्॥ 1-111-8(4986)
1-111-9(4987)
राज्ञो विचित्रवीर्यस्य सत्यवत्या मते स्थितः।
ऋत्विग्बिः सहितो भीष्मः सर्वैश्च कुरुपुङ्गवैः॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Footnotes
1-111-3 बृहतीश्यामे बृहतीपुष्पद्रक्तश्यामे॥ 1-111-4 प्रतिरूपः अनुरूपः॥ एकादशाधिकशततमोऽध्यायः॥ 111 ॥


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